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संछिप्त परिचय

प्रिय पाठकों,                              मेरा नाम अखलेश है, मैने ये blog सभी युवा पीढ़ियो को ध्यान मे रखकर तैयार किया है।जिससे कि आप सभी महत्वपूर्ण करियर गाइडेंस एवं प्रतिदिन आने  वाले नए नए जॉब इंटरव्यू एवं परीक्षाओं के लिए तैयारी कर सके एवं अपने जीवन को सफलता की नई उचाईयो पर ले जा सके। इन्ही शुभकामनाओ के साथ मैं आपसे आग्रह करता हु की ज्यादा से ज्यादा इस ब्लॉग पेज को लाइक करे और sabscribe करे।।                               धन्यवाद।                                                    

नन्ही परी(नव्या)

    pub    नन्ही परी नव्या, नव्या कौन है। नव्या है साड़े तीन साल की एक छोटी सी बच्ची। जिससे में हाल ही में मुम्बई में मिला।बहोत ही मासूम ,चंचल उसकी अदाओ को देखकर कोई भी उसे प्यार करे बगैर रह नही पाये, ऐसी है हमारी नव्या। पर ये क्या हुआ अचानक उसके बारे में जानते जानते अचानक मेरी आँखों मे से आंसू आना शुरू हो गए । जब मुझे पता चला कि टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में उसका पिछले 4 महीनों से इलाज चल रहा है, उसे कैंसर है।मेरे पैरों तले जमीन खिशक गई। दिमाग की नशे फटने को कर रही थी। मैं यही सोच रहा था आखिर ये बच्ची ही क्यों ,, क्या कसूर है उस नन्ही सी जान का। उसे ही क्यू, एक पल के लिए लगा काश उसकी तकलीफ मुझे मिल जाये।          आज ऐसा लगा इस्वर इतना निर्दयी कैसे हो सकता हैं।उसे समझ पाना असंभव हैं।। फिलहाल अगले दिन नव्या का बर्थडे हैं। आगे की जानकारी अगले लेख में दूंगा, जब नव्या के बारे में कोई भी जानकारी मिलेगी।                               ।।शुभरात्रि।।       ...

💐अटूट बंधन💐

🌸 अनंत बंधन 🌸 सुबह का समय था, गाँव की गलियाँ अभी भी शांत थीं। सूरज की हल्की किरणें खेतों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थीं। पंछियों की चहचहाहट और ठंडी हवा का स्पर्श वातावरण को जीवन से भर रहा था। इसी समय अंकित अपने हाथ में एक डायरी लिए नदी की ओर जा रहा था। उसे प्रकृति से प्रेरणा लेकर कविताएँ लिखना बहुत पसंद था। लेकिन उस दिन प्रकृति ने उसे कुछ और ही उपहार दिया। नदी के किनारे बने मंदिर की सीढ़ियों पर मीरा खड़ी थी। वह अपनी घड़े में पानी भर रही थी और एक लोकगीत गुनगुना रही थी। सफेद साड़ी पर गुलाबी फूलों के डिजाइन में वह अत्यंत मनमोहक लग रही थी। अंकित को ऐसा लगा मानो समय थम गया हो और पूरी दुनिया ने सिर्फ उसे निहारने का अवसर दिया हो। घर लौटते समय उसकी कलम से पंक्तियाँ झरने लगीं: “एक फूल खिला है नदी किनारे, जिसका हक़ है आसमान पर प्यारे। एक नज़र देखूँ, तो दिल भूल जाए, क्यों धड़क रहा है, और किसे पुकारे।” दिन बीतते गए और किस्मत बार-बार उन्हें आमने-सामने ला देती। अंकित अक्सर बहाने से नदी या मंदिर के आसपास पहुँच जाता, उम्मीद करता कि मीरा दिख जाए। कभी वह उसकी नज़र पकड़ लेती और हल्की मुस्कान देती, तो ...