❣️कॉलेज का एक तरफा प्यार❣️
कॉलेज वाला एकतरफ़ा प्यार
कॉलेज की गलियों में कदम रखते ही अजीब-सा रोमांच होता है। नई किताबें, नए चेहरे, नया माहौल—सब कुछ इतना ताज़ा और अनजाना कि दिल में एक अलग ही हलचल मच जाती है। लेकिन इन्हीं गलियों में कभी-कभी कुछ ऐसा मिल जाता है, जो हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत याद तो बन जाता है, पर कभी हक़ीक़त नहीं बन पाता।
राहुल का भी किस्सा कुछ ऐसा ही था।
पहली नज़र का एहसास
राहुल छोटे कस्बे से शहर पढ़ाई करने आया था। शर्मीला, सीधा-सादा और ज़्यादा बोलने वाला नहीं। उसके लिए कॉलेज का पहला दिन ही बहुत बड़ा अनुभव था। कक्षा में जगह तलाशते हुए उसकी नज़र खिड़की के पास बैठी एक लड़की पर पड़ी। हल्के गुलाबी सूट में, खुले बालों के बीच झूलती मुस्कान… मानो पूरी कक्षा उसी से रौशन हो गई हो।
उसका नाम था आकांक्षा।
उस पल राहुल ने जाना कि सिर्फ किताबों से ही ज़िंदगी नहीं बदलती, कभी-कभी एक मुस्कान भी इंसान को पूरी तरह से बदल देती है।
दोस्ती की कोशिश
राहुल ने कोशिश की कि किसी तरह उससे दोस्ती हो जाए। पर वो उतना साहसी नहीं था। कभी कोई पेन उधार लेने का बहाना बनाता, तो कभी असाइनमेंट में मदद माँग लेता। आकांक्षा हर बार मुस्कुराकर मदद कर देती, लेकिन शायद उसने राहुल की आँखों में छिपे राज़ कभी पढ़े ही नहीं।
धीरे-धीरे उनकी हल्की-सी जान-पहचान बनी, पर सिर्फ "क्लासमेट" तक। राहुल के दिल में तूफ़ान था, पर जुबां खामोश।
एकतरफ़ा सफ़र
कॉलेज की कैंटीन में जब आकांक्षा अपनी सहेलियों के साथ हँसती, राहुल चुपचाप कोने से देखता। जब वो मंच पर कविता सुनाती, राहुल की आँखें सिर्फ उसी पर टिकी रहतीं। जब भी वो उसकी तरफ़ देख मुस्कुरा देती, राहुल का दिन बन जाता।
पर ये सब सिर्फ उसके मन की दुनिया थी।
आकांक्षा के लिए शायद ये सब आम था, पर राहुल के लिए वही पल पूरी ज़िंदगी का ख़ज़ाना बन जाते।
कबूल करने की हिम्मत
कई बार राहुल ने सोचा कि उसे अपने दिल की बात कह दे। उसने ख़ुद को आईने के सामने खड़ा करके दर्जनों बार रिहर्सल भी किया—
"आकांक्षा, मैं तुम्हें पसंद करता हूँ।"
पर जब असल में मौका आता, उसकी हिम्मत जवाब दे देती। डर लगता कि कहीं दोस्ती भी न खो बैठे।
और फिर एक दिन उसे पता चला कि आकांक्षा किसी और को पसंद करती है।
दिल का टूटना
वो ख़बर सुनते ही राहुल का दिल जैसे हज़ार टुकड़ों में बिखर गया। उसकी रातें जाग-जागकर बीतने लगीं। उसने कभी जताया नहीं, पर भीतर ही भीतर वो टूट चुका था। वो सोचता रहा—
"क्या मेरी खामोशी ने मुझे उससे दूर कर दिया?
क्या अगर मैंने कह दिया होता तो कहानी अलग होती?"
लेकिन शायद यही एकतरफ़ा प्यार की सबसे बड़ी सच्चाई है—आप सब कुछ महसूस करते हैं, पर पा कभी नहीं पाते।
आख़िरी दिन
कॉलेज के आख़िरी दिन विदाई समारोह में आकांक्षा मंच पर थी। उसने सबको अलविदा कहा, अपनी यादें बाँटी। राहुल पीछे की बेंच पर बैठा, उसकी आँखों में आँसू थे।
उसने सोचा—
"कितना अजीब है, चार साल तक वो मेरी पूरी दुनिया रही, पर मेरी दुनिया में उसके होने का एहसास सिर्फ मेरे दिल तक ही सीमित रहा।"
राहुल ने उस दिन भी कुछ नहीं कहा। वो चुपचाप मुस्कुराया और दूर से तालियाँ बजाईं। आकांक्षा शायद हमेशा यही समझती रही कि राहुल बस उसका क्लासमेट था।
सालों बाद…
समय बीत गया। कॉलेज की यादें सिर्फ तस्वीरों और पुराने नोट्स में रह गईं। राहुल ज़िंदगी में आगे बढ़ा, नौकरी मिली, ज़िम्मेदारियाँ बढ़ीं।
लेकिन कभी-कभी जब वो पुराने दिनों को याद करता, तो दिल में हल्की-सी कसक ज़रूर उठती।
"कितना खूबसूरत था वो एहसास, जो मेरा था पर कभी मेरा हुआ ही नहीं।"
उसे समझ आ चुका था—कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में सिर्फ एहसास देने आते हैं, पाना उनकी किस्मत में नहीं लिखा होता।
नतीजा
राहुल का प्यार कभी पूरा नहीं हुआ, लेकिन उस एहसास ने उसे सिखाया कि सच्चा प्यार पाना नहीं, महसूस करना होता है। और कई बार एकतरफ़ा प्यार भी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत पूँजी बन जाता है—क्योंकि वो हमें मासूमियत, उम्मीद और दिल की गहराई का असली मतलब समझा जाता है।
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निष्कर्ष
कॉलेज वाला प्यार अक्सर मासूम होता है, खामोशी में डूबा हुआ, और कई बार अधूरा। पर उसकी यादें उम्रभर दिल में जिंदा रहती हैं। राहुल की तरह शायद हर किसी की ज़िंदगी में एक "आकांक्षा" होती है—जिससे हम मोहब्बत तो करते हैं, पर कह कभी नहीं पाते।
क्योंकि कुछ रिश्ते सिर्फ एहसासों में ही खूबसूरत लगते हैं, हक़ीक़त में नहीं।
@कहानीकार

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