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दोस्तो मै वापस अस गया हूँ।। बहोत दिनों से हैम बिछड़ गए थे।। बाते भी नही हो पाई थी।। कोई चिंता नही अब रोज मिलेंगे। मै डेली ब्लॉग लिखूंगा। सिर्फ और सिर्फ आपके लिए।। शुभरात्री।। good night
मिलते है कल नाइ सुबह के साथ।।
कॉलेज वाला एकतरफ़ा प्यार कॉलेज की गलियों में कदम रखते ही अजीब-सा रोमांच होता है। नई किताबें, नए चेहरे, नया माहौल—सब कुछ इतना ताज़ा और अनजाना कि दिल में एक अलग ही हलचल मच जाती है। लेकिन इन्हीं गलियों में कभी-कभी कुछ ऐसा मिल जाता है, जो हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत याद तो बन जाता है, पर कभी हक़ीक़त नहीं बन पाता। राहुल का भी किस्सा कुछ ऐसा ही था। पहली नज़र का एहसास राहुल छोटे कस्बे से शहर पढ़ाई करने आया था। शर्मीला, सीधा-सादा और ज़्यादा बोलने वाला नहीं। उसके लिए कॉलेज का पहला दिन ही बहुत बड़ा अनुभव था। कक्षा में जगह तलाशते हुए उसकी नज़र खिड़की के पास बैठी एक लड़की पर पड़ी। हल्के गुलाबी सूट में, खुले बालों के बीच झूलती मुस्कान… मानो पूरी कक्षा उसी से रौशन हो गई हो। उसका नाम था आकांक्षा। उस पल राहुल ने जाना कि सिर्फ किताबों से ही ज़िंदगी नहीं बदलती, कभी-कभी एक मुस्कान भी इंसान को पूरी तरह से बदल देती है। दोस्ती की कोशिश राहुल ने कोशिश की कि किसी तरह उससे दोस्ती हो जाए। पर वो उतना साहसी नहीं था। कभी कोई पेन उधार लेने का बहाना बनाता, तो कभी असाइनमेंट में मदद माँग लेता। आकांक्षा हर बा...
🌸 अनंत बंधन 🌸 सुबह का समय था, गाँव की गलियाँ अभी भी शांत थीं। सूरज की हल्की किरणें खेतों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थीं। पंछियों की चहचहाहट और ठंडी हवा का स्पर्श वातावरण को जीवन से भर रहा था। इसी समय अंकित अपने हाथ में एक डायरी लिए नदी की ओर जा रहा था। उसे प्रकृति से प्रेरणा लेकर कविताएँ लिखना बहुत पसंद था। लेकिन उस दिन प्रकृति ने उसे कुछ और ही उपहार दिया। नदी के किनारे बने मंदिर की सीढ़ियों पर मीरा खड़ी थी। वह अपनी घड़े में पानी भर रही थी और एक लोकगीत गुनगुना रही थी। सफेद साड़ी पर गुलाबी फूलों के डिजाइन में वह अत्यंत मनमोहक लग रही थी। अंकित को ऐसा लगा मानो समय थम गया हो और पूरी दुनिया ने सिर्फ उसे निहारने का अवसर दिया हो। घर लौटते समय उसकी कलम से पंक्तियाँ झरने लगीं: “एक फूल खिला है नदी किनारे, जिसका हक़ है आसमान पर प्यारे। एक नज़र देखूँ, तो दिल भूल जाए, क्यों धड़क रहा है, और किसे पुकारे।” दिन बीतते गए और किस्मत बार-बार उन्हें आमने-सामने ला देती। अंकित अक्सर बहाने से नदी या मंदिर के आसपास पहुँच जाता, उम्मीद करता कि मीरा दिख जाए। कभी वह उसकी नज़र पकड़ लेती और हल्की मुस्कान देती, तो ...
💞 मेरा पहला-पहला प्यार ❣️ पहला प्यार… ये शब्द सुनते ही दिल के किसी कोने में दबी हुई पुरानी यादें दस्तक देने लगती हैं। शायद हर किसी की ज़िंदगी में पहला प्यार ऐसा ही होता है—अनजाना, मासूम, भोला और इतना गहरा कि उसकी छाप कभी मिट नहीं पाती। ये कहानी है आरव और सृष्टि की। 1. मासूम मुलाक़ात आरव गाँव का सीधा-साधा लड़का था। आँखों में सपने और दिल में एक अजीब-सी सच्चाई। पढ़ाई में अच्छा था और माँ-बाप का सहारा भी। बारहवीं पास करने के बाद जब शहर कॉलेज जाने का मौका मिला, तो उसके जीवन में नई शुरुआत हुई। वहीं उसकी नज़र पहली बार सृष्टि पर पड़ी। वो सफेद सलवार-सूट पहने, बालों की चोटी झुलाती हुई कॉलेज के गेट से अंदर आई थी। उसकी आँखों में मासूमियत थी और चेहरे पर एक अजीब-सी चमक। आरव की नज़र जैसे वहीं ठहर गई। दिल ने धीरे से कहा— "शायद यही है मेरा पहला प्यार।" 2. अनकहा रिश्ता आरव और सृष्टि एक ही क्लास में थे। शुरुआत में बस हल्की-फुल्की नज़रें मिलतीं, लेकिन धीरे-धीरे दोनों की आँखों ने बात करना सीख लिया। क्लास में बैठते हुए, नोट्स लेते हुए या लाइब्रेरी में किताब ढूँढते हुए, जब भी नज़रें मिलतीं,...
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