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दोस्तो मै वापस अस गया हूँ।। बहोत दिनों से हैम बिछड़ गए थे।। बाते भी नही हो पाई थी।। कोई चिंता नही अब रोज मिलेंगे। मै डेली ब्लॉग लिखूंगा। सिर्फ और सिर्फ आपके लिए।। शुभरात्री।। good night
मिलते है कल नाइ सुबह के साथ।।
प्रिय पाठकों, मेरा नाम अखलेश है, मैने ये blog सभी युवा पीढ़ियो को ध्यान मे रखकर तैयार किया है।जिससे कि आप सभी महत्वपूर्ण करियर गाइडेंस एवं प्रतिदिन आने वाले नए नए जॉब इंटरव्यू एवं परीक्षाओं के लिए तैयारी कर सके एवं अपने जीवन को सफलता की नई उचाईयो पर ले जा सके। इन्ही शुभकामनाओ के साथ मैं आपसे आग्रह करता हु की ज्यादा से ज्यादा इस ब्लॉग पेज को लाइक करे और sabscribe करे।। धन्यवाद।
🌸 अनंत बंधन 🌸 सुबह का समय था, गाँव की गलियाँ अभी भी शांत थीं। सूरज की हल्की किरणें खेतों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थीं। पंछियों की चहचहाहट और ठंडी हवा का स्पर्श वातावरण को जीवन से भर रहा था। इसी समय अंकित अपने हाथ में एक डायरी लिए नदी की ओर जा रहा था। उसे प्रकृति से प्रेरणा लेकर कविताएँ लिखना बहुत पसंद था। लेकिन उस दिन प्रकृति ने उसे कुछ और ही उपहार दिया। नदी के किनारे बने मंदिर की सीढ़ियों पर मीरा खड़ी थी। वह अपनी घड़े में पानी भर रही थी और एक लोकगीत गुनगुना रही थी। सफेद साड़ी पर गुलाबी फूलों के डिजाइन में वह अत्यंत मनमोहक लग रही थी। अंकित को ऐसा लगा मानो समय थम गया हो और पूरी दुनिया ने सिर्फ उसे निहारने का अवसर दिया हो। घर लौटते समय उसकी कलम से पंक्तियाँ झरने लगीं: “एक फूल खिला है नदी किनारे, जिसका हक़ है आसमान पर प्यारे। एक नज़र देखूँ, तो दिल भूल जाए, क्यों धड़क रहा है, और किसे पुकारे।” दिन बीतते गए और किस्मत बार-बार उन्हें आमने-सामने ला देती। अंकित अक्सर बहाने से नदी या मंदिर के आसपास पहुँच जाता, उम्मीद करता कि मीरा दिख जाए। कभी वह उसकी नज़र पकड़ लेती और हल्की मुस्कान देती, तो ...
💞 मेरा पहला-पहला प्यार ❣️ पहला प्यार… ये शब्द सुनते ही दिल के किसी कोने में दबी हुई पुरानी यादें दस्तक देने लगती हैं। शायद हर किसी की ज़िंदगी में पहला प्यार ऐसा ही होता है—अनजाना, मासूम, भोला और इतना गहरा कि उसकी छाप कभी मिट नहीं पाती। ये कहानी है आरव और सृष्टि की। 1. मासूम मुलाक़ात आरव गाँव का सीधा-साधा लड़का था। आँखों में सपने और दिल में एक अजीब-सी सच्चाई। पढ़ाई में अच्छा था और माँ-बाप का सहारा भी। बारहवीं पास करने के बाद जब शहर कॉलेज जाने का मौका मिला, तो उसके जीवन में नई शुरुआत हुई। वहीं उसकी नज़र पहली बार सृष्टि पर पड़ी। वो सफेद सलवार-सूट पहने, बालों की चोटी झुलाती हुई कॉलेज के गेट से अंदर आई थी। उसकी आँखों में मासूमियत थी और चेहरे पर एक अजीब-सी चमक। आरव की नज़र जैसे वहीं ठहर गई। दिल ने धीरे से कहा— "शायद यही है मेरा पहला प्यार।" 2. अनकहा रिश्ता आरव और सृष्टि एक ही क्लास में थे। शुरुआत में बस हल्की-फुल्की नज़रें मिलतीं, लेकिन धीरे-धीरे दोनों की आँखों ने बात करना सीख लिया। क्लास में बैठते हुए, नोट्स लेते हुए या लाइब्रेरी में किताब ढूँढते हुए, जब भी नज़रें मिलतीं,...
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