"श्रधांजलि" पुलवामा अटैक
आज कुछ,
गमगीन सा हो गया हूँ,,
मैं देश की रक्षा के खतिर,
शहीद होने वालों के लिए ,
अस्थिर सा हो गया हूं,
जो लगा देते हैं जान की बाजी,
घर परिवार भूलकर,
उनकी आहुति देख,
बिन जल का मीन हो गया हूँ,
क्यों नही मिल रहा,
उन्हें हक़ उनका,
ये सोच सोचकर मै,
खिन्न हो गया हूँ,
अब तू ही बता भारत माँ,
मैं तो तेरा बेटा हु ना ,
बराबर ही प्रेम किया,
देश के प्रति सदैव समान ही कर्तव्य निभाए,
फिर क्यों मैं भिन्न हो गया हूँ।।
भिन्न हो गया हूँ।। (
अखलेश काकोड़िया)


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