दोस्तों ये कहानी मैने 2017 में लिखी थी, जरूर पढ़े।।
🌺#अमर_प्रेम🌺
अजय एक बहुत ही सीधा साधा लड़का है वह बचपन से ही पढ़ने में बहुत होशियार है। उसको आज कल के लड़कों की तरह सजना, स्मार्ट हैंडसम लगना, जींस टीशर्ट पहनना बिल्कुल पसंद नहीं है, उसे तो बस 90's के हीरो की तरह सिंपल शर्ट पेंट पहनना पसंद है और हो भी क्यों ना, आखिर बेचारे का पूरा बचपन ही गरीबी और संघर्ष के बीच बीत गया।
पिता मजदूरी करते थे और मां भी उनका साथ देती। घर में अजय के अलावा उसके 2 छोटे भाई, बहन और भी थे। बमुश्किल दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता था। अब ऐसे में पेट भरे या बच्चों को पढ़ाए , विकट स्थिति थी। अजय ने बचपन में ही तय कर लिया था कि चाहे जो भी परेशानी आए चाहे कितनी भी कठिनाइयों का उसे सामना करना पड़े, पर वह पढ़ेगा और एक दिन माता पिता के कदमों में सारी दुनिया की लाकर रख देगा।
इसी सोच के साथ अजय खूब मेहनत करता, दिन में मजदूरी करता ओर रात को दिए की रोशनी में पढ़ाई करता। देखते ही देखते अजय ने 10वी और 12 की की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । वह कस्बे के ही कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री भी पूरी कर लेता हैं।अब वह आगे की पढ़ाई के लिए शहर का रुख करता हैं और यही से उसका जीवन बदल जाता है।
अजय आज से पहले कभी भी किसी बड़े शहर में नहीं गया था। वहां की लाइफ स्टाइल , वहां का पहनावा , रहना सहन सब कुछ उसके लिए बिल्कुल नया सा था। ऐसे में शहर में अकेले रहना अजय के पिता को खाए जा रहा था। अजय के पिता उससे कहते हैं कि बेटा तू बहुत सीधा है और शहर में लोग न जाने कैसे होंगे , तू एक काम कर वहां शहर में हमारे दूर के रिश्तेदार रहते हैं। उनके घर जाकर वहीं रहकर पढ़ाई करना। ऐसे में तुझे आसरा भी मिल जाएगा और अकेलापन भी नहीं लगेगा। पिता की बात मानकर अजय शहर आ जाता है।
शहर आने पर अजय अपना दाखिला MBA में वहां के प्रसिद्ध कॉलेज में ले लेता है। उसके बाद वह अपने दूर के रिश्तेदार रमेश चाचा के घर आ जाता है। रमेश चाचा का घर काफी बड़ा है, परिवार में सिर्फ तीन ही लोग हैं रमेश चाचा और उनकी बीवी और एक बेटी , वह भी फाइनल ईयर में पढ़ रही है उसका नाम रीना है। रीना बहुत ही सुंदर सुशील और काबिल लड़की है।
अजय इतना शालीन है कि अपने व्यवहार से सभी का मन मोह लेता है। रमेश चाचा के घर के ऊपर का माला खाली होता है और वह अपने सामान सहित वही रहना शुरू कर देता है। रोज सुबह उठकर कॉलेज जाना ओर शाम को अपना खाना खुद बनाना अब यही उसकी दिनचर्या हो गई थी। हफ्ते में जिस दिन छुट्टी होती थी उस दिन वह कोई पार्ट टाइम जॉब भी कर लिया करता था, जिससे कि उसका खर्चा निकल जाता था।
तभी अचानक कुछ दिन बाद दिवाली त्यौहार आ जाता है। रमेश चाचा अजय को भी खाने पर बुला लेते हैं, पहले तो वह मना करता है पर उनके बार बार आग्रह करने पर वह उनके साथ शामिल हो जाता है। यह पहला मौका था जब वह पहली बार रीना से मिलने वाला था। सभी खाने के टेबल पर होते है , ओर पहली बार अजय ओर रीना में बातचीत होती हैं। दोनों एक दूसरे से शर्माते हुए बहुत सारी बातें करते हैं, और इस तरह हसी मजाक करते हुए पूरा परिवार एक साथ दिवाली का त्यौहार मनाता है । ये तो बस शुरुआत भर थी उस #अमर_प्रेम की जो मैं आपको आगे बताने वाला हूँ।
पहला साल 🌸
शुरुआत में दोनों सिर्फ़ अजनबी थे। पर रोज़मर्रा की छोटी-छोटी मुलाक़ातें उन्हें करीब लाने लगीं।
कभी रीना सीढ़ियों से ऊपर जाते समय अजय से टकरा जाती, तो दोनों एक-दूसरे को देखकर हल्की मुस्कान दे देते।
कभी रीना कहती—
“अजय , यह सवाल समझा दो न…”
और अजय मुस्कुराकर उसके पास बैठ जाता। वह सवाल समझाता, लेकिन नज़रें अक्सर रीना की मासूमियत पर ही अटक जातीं।
उनके बीच एक अनकहा रिश्ता पनपने लगा।
दूसरा साल 💫
अब वे दोनों एक-दूसरे के बिना दिन की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
बरसात की शाम को खिड़की के पास बैठकर वे बारिश देखते। रीना हँसकर कहती—
“कभी सोचा है, बारिश की हर बूंद जैसे दिल की धड़कन हो?”
अजय बस चुपचाप उसे देखता रहता। कहना चाहता— “मेरी हर धड़कन में तुम ही तो हो।”
लेकिन शब्द उसके होंठों तक नहीं आते।
कभी-कभी रीना छत पर जाती और अजय
उसके साथ बैठकर आसमान में टिमटिमाते तारों को गिनने लगता। उनके बीच चुप्पी होती, लेकिन वही चुप्पी सबसे गहरी बात कहती।
तीसरा साल ❤️
अब उनका रिश्ता ऐसा हो चुका था कि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे लगते। दोनों एक दूसरे से घंटों बात किया करते।
रीना जब देर तक कॉलेज से लौटकर आती तो अजय बेचैन हो जाता। और जब कभी अजय देर रात पढ़ाई करता, तो रीना चुपके से उसके लिए चाय रख देती।
उनकी नज़रों में अब साफ़ झलकने लगा था कि यह सिर्फ़ दोस्ती नहीं, बल्कि अपार प्रेम है। लेकिन दोनों ही शब्दों में इसे कहने से डरते। शायद रिश्तेदारों की परवाह, शायद समाज का डर, या शायद यह डर कि अगर उन्होंने प्रेम जताया और अस्वीकार हुआ तो यह साथ भी छिन जाएगा।
वह आख़िरी दिन 💔
फिर भी समय ने अपना काम किया। अजय की पढ़ाई पूरी हो गई, और अब उसे शहर छोड़ना था। अजय रीना से बहुत कुछ कहना चाहता था, पर उसके सामने जिम्मेदारियों बहुत सारी थी।सबसे पहले उसे अपने परिवार के लिए कुछ करना था।
उस सुबह रीना की आँखें नम थीं। वह छत पर खड़ी थी, जैसे पूरे आसमान को रोक लेना चाहती हो।
अजय ने अपना बैग उठाया, सीढ़ियाँ उतरीं और आख़िरी बार मुड़कर देखा। रीना की आँखों में प्रेम का अथाह सागर था, होंठों पर मौन और दिल में तूफ़ान।
अजय ने मुस्कुराने की कोशिश की, पर उसकी आँखें सब कह रही थीं—“काश, यह पल यहीं ठहर जाता।”
रीना की साँसें रुक-सी गईं। वह कहना चाहती थी—“मत जाओ, मैं तुम्हारे बिना अधूरी हूँ।”
पर शब्द गले में अटक गए।
गाड़ी चली गई, अजय दूर निकल गया।
रीना छत पर खड़ी रह गई, उसकी आँखों से आँसू बहते रहे।
उनका प्रेम कभी शब्दों में नहीं ढल सका, लेकिन तीन साल की हर मुस्कान, हर चुप्पी, हर नज़र उस प्रेम को अनन्त बना गई।
कभी-कभी सबसे सच्चा प्यार वही होता है, जो अनकहा रह जाता है… ❣️🌹
#अजय_की_वापसी
रीना से दूर हुए अजय को आज पूरे 2 साल बीत गए । अजय ने ओर न रीना ने कभी भी एक दूसरे से संपर्क करने की भी कोशिश नहीं की। लेकिन रीना को आज भी उसका इंतजार है। रीना हर दिन छत पर बैठकर घंटों एक टक रास्ते के ओर निहारा करती है और उसकी आंखों से आशु बहते रहते हैं जैसे कोई सावन चल रहा हो।कितने लड़के वाले उसे देखने आए पर रीना ने सभी शादी करने से मना कर दिया। अब वह उम्मीद खो चुकी थी।
पुनर्मिलन और प्रेम की पराकाष्ठा ✨
दो साल बीत चुके थे।
शहर छोड़ते समय रीना की आँखों से टपके आँसू आज भी अजय के दिल में धड़कन बनकर बसते थे। उन दो सालों में उसने बड़ी मेहनत की, पढ़ाई के बाद एक नामी कंपनी में नौकरी पाई। उसके पास अब सब कुछ था—सपनों का करियर, पहचान, और भविष्य।
लेकिन दिल में एक ही कमी थी—रीना।
उस सुबह जब वह उसी पुराने घर के दरवाज़े पर खड़ा था, उसके सीने में तूफ़ान उमड़ रहा था। हाथ में छोटा-सा उपहार, आँखों में उम्मीद, और दिल में धड़कनें जो तेज़ी से बढ़ती जा रही थीं।
दरवाज़ा धीरे से खुला।
रीना सामने खड़ी थी। वही मासूम आँखें, वही मुस्कुराते होंठ, पर आज उन आँखों में अधूरी चाहत के साये थे।
जैसे ही उसकी नज़र अजय पर पड़ी, उसका चेहरा खिल उठा।
पहले तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ—मानो सपना हो।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं, आँखों में चमक लौट आई।
उसके होंठ कांपते हुए बस इतना कह पाए—
“अ… अजय… तुम…?”
अजय ने हल्की मुस्कान दी। उसकी आँखें भीग गईं।
“हाँ रीना… मैं वापस आ गया हूँ।
इस बार… हमेशा के लिए।”
रीना का दिल धड़क उठा। उसकी आँखों से खुशी के आँसू झरने लगे।
वह अपने होंठ दबाकर आँसू रोकने की कोशिश कर रही थी, पर उसकी मुस्कान बार-बार छलक पड़ती।
उसके हाथ काँपते हुए उसके सीने पर आ टिके, जैसे कह रहे हों—“कहाँ चले गए थे…? मुझे अधूरा छोड़कर…?”
अजय ने धीरे से उसका हाथ थाम लिया।
“इन दो सालों ने मुझे बहुत कुछ दिया, रीना…
पर यह भी सिखाया कि बिना तुम्हारे सब अधूरा है।
आज मैं लौटा हूँ… सिर्फ़ तुमसे यह कहने कि मैं तुम्हें चाहता हूँ।
क्या तुम… मेरी बनोगी?”
रीना की आँखों से आँसू बह रहे थे, पर चेहरा हँस रहा था।
वो शब्दों में कुछ न कह पाई, बस अपनी झुकी पलकें और काँपते होंठ अजय को जवाब दे गए।
उसका चेहरा जैसे कह रहा हो—
“मैंने इन दो सालों में सिर्फ़ तुम्हें ही चाहा है… तुम्हारा इंतज़ार ही मेरी सबसे बड़ी दुआ थी।”
उस पल में, उनकी आँखें मिलकर सब कह गईं।
वो अनकहा प्रेम, जो तीन साल में पनपा और दो साल की दूरी में तपकर सोना बना, आज शब्दों में ढल गया।
दरवाज़े पर खड़े दोनों की दुनिया थम गई।
संध्या के चेहरे पर व्यथा भी थी और अपार खुशी भी—जैसे किसी ने अधूरी किताब का आख़िरी पन्ना पूरा कर दिया हो।
कहानीकार_अखिल
तो कैसी लगी आपको स्टोरी, प्लीज कमेंट करके बताए।।
प्रिय पाठकों, मेरा नाम अखलेश है, मैने ये blog सभी युवा पीढ़ियो को ध्यान मे रखकर तैयार किया है।जिससे कि आप सभी महत्वपूर्ण करियर गाइडेंस एवं प्रतिदिन आने वाले नए नए जॉब इंटरव्यू एवं परीक्षाओं के लिए तैयारी कर सके एवं अपने जीवन को सफलता की नई उचाईयो पर ले जा सके। इन्ही शुभकामनाओ के साथ मैं आपसे आग्रह करता हु की ज्यादा से ज्यादा इस ब्लॉग पेज को लाइक करे और sabscribe करे।। धन्यवाद।
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