दो बरस की जुदाई
दो बरस का ये फ़ासला, जैसे सदियाँ हो गईं,
तेरी यादों की धूप में मेरी आँखें नम हो गईं।
चाँदनी रातों में तेरा चेहरा मुस्काता है,
हर सपनों की चौखट पर तेरा नाम आता है।
ख़त में लिखे अल्फ़ाज़ से तेरी खुशबू आती है,
मेरी साँसों के सागर में तेरी धड़कन समाती है।
मेरी आँखों की नमी को तू ही समझ पाएगा,
दिल की इस बेचैनी को तू ही सुन पाएगा।
एक दिन ये दूरियाँ दरिया में बह जाएँगी,
ख़्वाबों की तरह खुशबुएँ फिर लौट आएँगी।
जब मेरा नायक मुझे बाँहों में भर लेगा,
दो बरस की ये जुदाई एक पल में मिट जाएगा।
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@कहानीकार
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