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❣️ मेरा पहला पहला प्यार ❣️

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💞 मेरा पहला-पहला प्यार ❣️ पहला प्यार… ये शब्द सुनते ही दिल के किसी कोने में दबी हुई पुरानी यादें दस्तक देने लगती हैं। शायद हर किसी की ज़िंदगी में पहला प्यार ऐसा ही होता है—अनजाना, मासूम, भोला और इतना गहरा कि उसकी छाप कभी मिट नहीं पाती। ये कहानी है आरव और सृष्टि की। 1. मासूम मुलाक़ात आरव गाँव का सीधा-साधा लड़का था। आँखों में सपने और दिल में एक अजीब-सी सच्चाई। पढ़ाई में अच्छा था और माँ-बाप का सहारा भी। बारहवीं पास करने के बाद जब शहर कॉलेज जाने का मौका मिला, तो उसके जीवन में नई शुरुआत हुई। वहीं उसकी नज़र पहली बार सृष्टि पर पड़ी। वो सफेद सलवार-सूट पहने, बालों की चोटी झुलाती हुई कॉलेज के गेट से अंदर आई थी। उसकी आँखों में मासूमियत थी और चेहरे पर एक अजीब-सी चमक। आरव की नज़र जैसे वहीं ठहर गई। दिल ने धीरे से कहा— "शायद यही है मेरा पहला प्यार।" 2. अनकहा रिश्ता आरव और सृष्टि एक ही क्लास में थे। शुरुआत में बस हल्की-फुल्की नज़रें मिलतीं, लेकिन धीरे-धीरे दोनों की आँखों ने बात करना सीख लिया। क्लास में बैठते हुए, नोट्स लेते हुए या लाइब्रेरी में किताब ढूँढते हुए, जब भी नज़रें मिलतीं,...

❣️कॉलेज का एक तरफा प्यार❣️

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कॉलेज वाला एकतरफ़ा प्यार कॉलेज की गलियों में कदम रखते ही अजीब-सा रोमांच होता है। नई किताबें, नए चेहरे, नया माहौल—सब कुछ इतना ताज़ा और अनजाना कि दिल में एक अलग ही हलचल मच जाती है। लेकिन इन्हीं गलियों में कभी-कभी कुछ ऐसा मिल जाता है, जो हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत याद तो बन जाता है, पर कभी हक़ीक़त नहीं बन पाता। राहुल का भी किस्सा कुछ ऐसा ही था। पहली नज़र का एहसास राहुल छोटे कस्बे से शहर पढ़ाई करने आया था। शर्मीला, सीधा-सादा और ज़्यादा बोलने वाला नहीं। उसके लिए कॉलेज का पहला दिन ही बहुत बड़ा अनुभव था। कक्षा में जगह तलाशते हुए उसकी नज़र खिड़की के पास बैठी एक लड़की पर पड़ी। हल्के गुलाबी सूट में, खुले बालों के बीच झूलती मुस्कान… मानो पूरी कक्षा उसी से रौशन हो गई हो। उसका नाम था आकांक्षा। उस पल राहुल ने जाना कि सिर्फ किताबों से ही ज़िंदगी नहीं बदलती, कभी-कभी एक मुस्कान भी इंसान को पूरी तरह से बदल देती है। दोस्ती की कोशिश राहुल ने कोशिश की कि किसी तरह उससे दोस्ती हो जाए। पर वो उतना साहसी नहीं था। कभी कोई पेन उधार लेने का बहाना बनाता, तो कभी असाइनमेंट में मदद माँग लेता। आकांक्षा हर बा...

दो बरस की जुदाई

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दो बरस की जुदाई दो बरस का ये फ़ासला, जैसे सदियाँ हो गईं, तेरी यादों की धूप में मेरी आँखें नम हो गईं। चाँदनी रातों में तेरा चेहरा मुस्काता है, हर सपनों की चौखट पर तेरा नाम आता है। ख़त में लिखे अल्फ़ाज़ से तेरी खुशबू आती है, मेरी साँसों के सागर में तेरी धड़कन समाती है। मेरी आँखों की नमी को तू ही समझ पाएगा, दिल की इस बेचैनी को तू ही सुन पाएगा। एक दिन ये दूरियाँ दरिया में बह जाएँगी, ख़्वाबों की तरह खुशबुएँ फिर लौट आएँगी। जब मेरा नायक मुझे बाँहों में भर लेगा, दो बरस की ये जुदाई एक पल में मिट जाएगा। --- @कहानीकार

सुहागरात एक नई शुरुआत

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🌸 सुहागरात : एक नई शुरुआत गाँव के बीचों-बीच सजाए गए बड़े आँगन में शहनाइयों की गूंज थी। हर ओर रोशनी, रंग-बिरंगे फूल और रिश्तेदारों की चहल-पहल। नृत्य और गीतों से माहौल और भी मधुर लग रहा था। उसी भीड़ के बीच दुल्हन बनी सुहानी लाल चुनरी में लिपटी, शर्म से झुकी हुई अपने कक्ष की ओर ले जाई गई। उसकी हथेलियों पर सजी मेहंदी अब तक गहरी हो चुकी थी, और पायल की रुनझुन जैसे उसके दिल की धड़कनों का संगीत बजा रही थी। आज उसकी ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन था — उसकी शादी और सुहागरात। दूसरी ओर, दूल्हा आरव भी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मुश्किल से बचते हुए कमरे की ओर बढ़ा। वह भी भीतर से उतना ही घबराया हुआ था जितना सुहानी। भले ही आधुनिक शिक्षा और शहर में रहने के कारण वह खुले विचारों वाला था, परंतु इस अनोखे रिश्ते की पहली रात का भार उसके हृदय पर भी उतना ही था। कमरे का दृश्य कमरा फूलों और दीपों से सजाया गया था। छत से झूलते चमेली के गजरे और बिस्तर पर बिछी गुलाब की पंखुड़ियाँ कमरे को जैसे एक स्वप्नलोक बना रही थीं। हल्की पीली रोशनी, अगरबत्तियों की सुगंध और बाहर से आती शहनाई की धीमी धुन वातावरण को और भ...

अमर प्रेम

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दोस्तों ये कहानी मैने 2017 में लिखी थी, जरूर पढ़े।। 🌺#अमर_प्रेम🌺 अजय एक बहुत ही सीधा साधा लड़का है वह बचपन से ही पढ़ने में बहुत होशियार है। उसको आज कल के लड़कों की तरह सजना, स्मार्ट हैंडसम लगना, जींस टीशर्ट पहनना बिल्कुल पसंद नहीं है, उसे तो बस 90's के हीरो की तरह सिंपल शर्ट पेंट पहनना पसंद है और हो भी क्यों ना, आखिर बेचारे का पूरा बचपन ही गरीबी और संघर्ष के बीच बीत गया। पिता मजदूरी करते थे और मां भी उनका साथ देती। घर में अजय के अलावा उसके 2 छोटे भाई, बहन और भी थे। बमुश्किल दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता था। अब ऐसे में पेट भरे या बच्चों को पढ़ाए , विकट स्थिति थी। अजय ने बचपन में ही तय कर लिया था कि चाहे जो भी परेशानी आए चाहे कितनी भी कठिनाइयों का उसे सामना करना पड़े, पर वह पढ़ेगा और एक दिन माता पिता के कदमों में सारी दुनिया की लाकर रख देगा। इसी सोच के साथ अजय खूब मेहनत करता, दिन में मजदूरी करता ओर रात को दिए की रोशनी में पढ़ाई करता। देखते ही देखते अजय ने 10वी और 12 की की प रीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । वह कस्बे के ही कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री भी ...

💐अटूट बंधन💐

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🌸 अनंत बंधन 🌸 सुबह का समय था, गाँव की गलियाँ अभी भी शांत थीं। सूरज की हल्की किरणें खेतों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थीं। पंछियों की चहचहाहट और ठंडी हवा का स्पर्श वातावरण को जीवन से भर रहा था। इसी समय अंकित अपने हाथ में एक डायरी लिए नदी की ओर जा रहा था। उसे प्रकृति से प्रेरणा लेकर कविताएँ लिखना बहुत पसंद था। लेकिन उस दिन प्रकृति ने उसे कुछ और ही उपहार दिया। नदी के किनारे बने मंदिर की सीढ़ियों पर मीरा खड़ी थी। वह अपनी घड़े में पानी भर रही थी और एक लोकगीत गुनगुना रही थी। सफेद साड़ी पर गुलाबी फूलों के डिजाइन में वह अत्यंत मनमोहक लग रही थी। अंकित को ऐसा लगा मानो समय थम गया हो और पूरी दुनिया ने सिर्फ उसे निहारने का अवसर दिया हो। घर लौटते समय उसकी कलम से पंक्तियाँ झरने लगीं: “एक फूल खिला है नदी किनारे, जिसका हक़ है आसमान पर प्यारे। एक नज़र देखूँ, तो दिल भूल जाए, क्यों धड़क रहा है, और किसे पुकारे।” दिन बीतते गए और किस्मत बार-बार उन्हें आमने-सामने ला देती। अंकित अक्सर बहाने से नदी या मंदिर के आसपास पहुँच जाता, उम्मीद करता कि मीरा दिख जाए। कभी वह उसकी नज़र पकड़ लेती और हल्की मुस्कान देती, तो ...

"ysense" से लाखों रुपया कमाए

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"वापसी"

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दोस्तो मै वापस अस गया हूँ।। बहोत दिनों से हैम बिछड़ गए थे।। बाते भी नही हो पाई थी।। कोई चिंता नही अब रोज मिलेंगे। मै डेली ब्लॉग लिखूंगा। सिर्फ और सिर्फ आपके लिए।। शुभरात्री।। good night मिलते है कल नाइ सुबह के साथ।।

*भारतीय संस्कृति में क्वारेटाइन या सूतक का महत्व*

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#क्वारेंटाईन या #सूतक का महत्व।। *हम तो आदिकाल से क्वारेंटाईन करते हैं, तुम्हें अब समझ आया* -------------------- *त्वरित टिप्पणी* -------------------- *आज जब सिर पर घूमता एक वायरस हमारी मौत बनकर बैठ गया तब हम समझें कि हमें क्वारेंटाईन होना चाहिये, मतलब हमें ‘‘सूतक’’ से बचना चाहिये। यह वही ‘सूतक’ है जिसका भारतीय संस्कृति में आदिकाल से पालन किया जा रहा है। जबकि विदेशी संस्कृति के नादान लोग हमारे इसी ‘सूतक’ को समझ नहीं पा रहे थे। वो जानवरों की तरह आपस में चिपकने को उतावले थे ? वो समझ ही नहीं रहे थे कि मृतक के शव में भी दूषित जीवाणु होते हैं ? हाथ मिलाने से भी जीवाणुओं का आदान-प्रदान होता है ? और जब हम समझाते थे तो वो हमें जाहिल बताने पर उतारु हो जाते । हम शवों को जलाकर नहाते रहे और वो नहाने से बचते रहे और हमें कहते रहे कि हम गलत हैं और आज आपको कोरोना का भय यह सब समझा रहा है।* 👉 *हमारे यहॉ बच्चे का जन्म होता है तो जन्म ‘‘सूतक’’ लागू करके मॉ-बेटे को अलग कमरे में रखते हैं, महिने भर तक, मतलब क्वारेंटाईन करते हैं।* 👉 हमारे यहॉ कोई मृत्यु होने पर परिवार सूतक में रहता है लगभग 12 द...

एक माँ का संघर्ष

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सुबह के पौने तीन (2:45) और एक माँ का संघर्ष।। उक्त दृश्य आज सुबह का है। लोकेशन 11057-पठानकोट एक्सप्रेस, जनरल बोगी का है। गाड़ी नाशिक रेल्वे स्टेशन पर है। एक गरीब माँ जिसके तीन बच्चे है। एक बेटी ढाई साल की, एक बेटा एक साल 6 महीने का और गोद में एक दूध पीती मासूम सी बच्ची। वह महिला बाजु वाली बोगी से निकलकर मेरी वाली बोगी में आकर दरवाजे पर ही बैठ जाती हैं। पूछने पर उसने कहा की बच्चे भीड़ के वजह से रो रहे थे तो उधर से लोगो ने भाग दिया। मेने कहा भीड़ तो यहाँ भी बहोत है। उसने कहा देखते है साहब। कुछ देर बाद ट्रेन स्टेशन छोड़ रही है, ट्रैन में हवा काफी तेज लगने लगी है। बच्चे सोने के लिए रो रहे, बिलक रहे है या फिर शायद भूख से, कुछ समझ नही आ रहा। वो एक एक कर तीनो को सुलाने का प्रयास कर रही हैं, उस बिच जिद करते बच्चो को पिट भी रही है। कुछ देर बाद बच्चे सो जाते है, अब सुबह की ठण्ड लगने लगी है।बच्चो को उड़ाने ,ढकने का वह हर संभव प्रयास कर रही हैं उसके पास सिवाए अपने आँचल के बच्चो को उड़ने के लिए कुछ भी नही है। वो खूद भी नींद के झोंको से लड़ रही है। बार बार वह रट बिलखते बस्कचो को थपथपाती तो कभी अपन...

हेलमेट(Helmet) का महत्त्व

#यातायात सुरक्षा सप्ताह *हेलमेट तुम मेरे सच्चे दोस्त हो, तुम जब साथ होते हो, तो मुझे किसी बात का डर नही होता , तुम साथ होते हो तो परिवार की, चिंता भी खत्म हो जाती हे, तुम साथ होते हो तो मुझमे, निडरता आ जाती है, तुम हर होने वाली दुर्घटना में, मेरे संरक्षक बन जाते हो, हर मौसम में मेरा सहारा, बन जाते हो, सर्दी में सर्द हवाओं से, गर्मी में लू के थपेड़ों से, तो बारिश में छाता बन मुझे बचाते हो, बिन तुम्हारे सफर अधूरा लगता है, फिर क्यू न कहु में, की तुम मेरे सच्चे मित्र हो।।* *यातायात सुरक्षा सप्ताह -आज से प्रारम्भ हो गया है।। मित्रो हेलमेट का उपयोग करिये , और सही सलामत घर पहुँचिये ।। क्योंकि आपका भी कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा होगा*🌹🌹🌹🌹

"सुकून"

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चितन , मनन, गहन अध्धय्यन, सुकून को तरसता मेरा मन, पग-पग ,डगर- डगर,  गली, मोहल्ला हर नगर-नगर, बीहड़, कानन और वृन्दावन, तट, नभ, कलरव न माने मन।।  घर, कुटुंब और जिम्मेदारी, दिनचर्या हो गई व्यस्त सारी।।  अब तो मन में एक ही आस मिल जाये चैन की सांस,  कुछ पल बिताऊँ अपनों साथ, है सकून अब तो लौट आ मेरे पास,  फिर भी अधूरा पाता हूँ मै खुदको, फिरता हूं उदास- उदास, फिरता हूं उदास उदास, है सकूँ।।

"श्रधांजलि" पुलवामा अटैक

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#PULWAMAATTACK_ CRPF {अर्धसैनिक बल के हक़ के लिए ,उन्हें शहीद का दर्जा मिलने हेतु, पेंशन मिलने हेतु, शाशन से गुजारिश}  आज कुछ,  गमगीन सा हो गया हूँ,,  मैं देश की रक्षा के खतिर,  शहीद होने वालों के लिए ,  अस्थिर सा हो गया हूं,  जो लगा देते हैं जान की बाजी,  घर परिवार भूलकर,  उनकी आहुति देख,  बिन जल का मीन हो गया हूँ,  क्यों नही मिल रहा,  उन्हें हक़ उनका,  ये सोच सोचकर मै,  खिन्न हो गया हूँ,  अब तू ही बता भारत माँ,  मैं तो तेरा बेटा हु ना ,  बराबर ही प्रेम किया,  देश के प्रति सदैव समान ही कर्तव्य निभाए,  फिर क्यों मैं भिन्न हो गया हूँ।।  भिन्न हो गया हूँ।। ( अखलेश काकोड़िया)

जीवन संघर्ष ( गुलमोहर)

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बाज लगभग 70 वर्ष जीता है, परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं- 1. पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है व शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं। 2. चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है। 3. पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं। भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना.... तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं। उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे, या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे... या फिर स्वयं को पुनर्स्थापित करे, आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में। जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा। बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है। वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है, और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया। सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान प...

गुलमोहर(हमारी सोच)

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देश : सर्बिया राजधानी : बेलग्राद सर्बिया का एक गांव डोकाट जिसकी आबादी लगभग 265 लोगों की है इस गांव में तकरीबन अधिकतर बड़ी उम्र के लोग हैं जो 50 साल या उससे ऊपर के डोकाट में बच्चों की पैदावार में कमी और जनरेशन गैप की वजह से उस गांव में मौजूद एक प्राइमरी स्कूल को इस वजह से बंद करना पड़ा कि वहां कोई भी बच्चा या बच्ची पढ़ने वाला नहीं था सर्बिया के इस गाँव में निकोलीना नामी एक बच्ची जब स्कूल जाने के काबिल हुई तो सर्बिया की गवर्नमेंट ने स्कूल दोबारा 7 साल बाद खोलने का एलान किया निकोलीना की टीचर मैलिका मैकेज है जो नीकोलीना के लिए हर रोज स्कूल आती है टीचर इस बच्ची को इस बात का एहसास नहीं होने देती कि वह क्लास में अकेली पढ़ने वाली है ! दूसरा मामला- देश -जापान! राजधानी-टोक्यो! जापान में चलने वाली एक ट्रेन ,सुदूर उत्तर के एक द्वीप कामी शिरातकी को मेनलैंड से जोड़ती है । तीन साल पहले पर्याप्त यात्री ना मिलने के कारण उस ट्रेन को बंद करने का फ़ैसला लिया गया था !लेकिन तभी ट्रेन कम्पनी को पता चला ,उस ट्रेन से रोज़ एक लड़की अपने स्कूल जाती है । रोज़ एक अकेली लड़की ही उस ट्रेन की यात्र...

गुलमोहर( love series)

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राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे। दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले। दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे। चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था। दस साल हो गए थे शादी को मग़र साथ मे छः साल ही रह पाए थे। चार साल तो तलाक की कार्यवाही में लग गए। राधिका के हाथ मे दहेज के समान की लिस्ट थी जो अभी नवीन के घर से लेना था और नवीन के हाथ मे गहनों की लिस्ट थी जो राधिका से लेने थे। साथ मे कोर्ट का यह आदेश भी था कि नवीन दस लाख रुपये की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाएगा। राधिका और नवीन दोनो एक ही टेम्पो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे। दहेज में दिए समान की निशानदेही राधिका को करनी थी। इसलिए चार वर्ष बाद ससुराल जा रही थी। आखरी बार बस उसके बाद कभी नही आना था उधर। सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे। बस तीन प्राणी बचे थे।नवीन, राधिका और राधिका की माता जी। नवीन घर मे अकेला ही रहता था। मां-बाप और भाई आज भी गांव में ही रहते हैं। राधिका और नवीन का इकलौता बेटा जो अभी सात वर्ष का है कोर्ट के फैसले के अनुसार बालिग होने तक वह राधिका के पास ही रहेगा। नवीन महीने ...

"एक पिता की अधूरी इच्छा"

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#एक पिता का दर्द..... आज पूनम लव मैरिज कर अपने पापा के पास आयी, और अपने पापा से कहने लगी पापा मैंने अपनी पसंद के लड़के से शादी कर ली, उसके पापा बहुत गुस्सें में थे, पर वो बहुत सुलझें शख्स थे, उसने बस अपनी बेटी से इतना कहा, मेरे घर से निकल जाओं, बेटी ने कहा अभी इनके पास कोई काम नही हैं, हमें रहने दीजिए हम बाद में चलें जाएगें, पर उसके पापा ने एक नही सुनी और उसे घर से बाहर कर दिया......... कुछ साल बित गयें, अब पूनम के पापा नही रहें, और दुर्भाग्यवश जिस लड़के ने पूनम ने शादी की वो भी उसे धोखा देकर भाग गया, पूनम की एक लड़की एक लड़का था, पूनम खुद का एक रेस्टोरेंट चला रही थी, जिससे उसका जीवन यापन हो रहा था......... पूनम को जब ये खबर हुई उसके पापा नही रहें, तो उसने मन में सोचा अच्छा हुआ, मुजे घर से निकाल दिया था, दर_दर की ठोकरें खाने छोड़ दिया, मेरे पति के छोड़ जाने के बाद भी मुजे घर नही बुलाया, मैं तो नही जाऊंगी उनकी अंतिम यात्रा में, पर उसके ताऊ जी ने कहा पूनम हो आऊ, जाने वाला शख्श तो चला गया अब उनसे दुश्मनी कैसी, पूनम ने पहले हाँ ना किया फिर सोचा चलों हो आती हूं, देखू तो जिन्होने मुजे ठुकर...

मेरा अनुभव( My experience)

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हेल्लो दोस्तों, आप पढ़ रहे है मेरे अनुभव मेरे ब्लॉग akleshkakodiya.blogspot.com पर। बहोत सारे अप्डेट्स के लिए मेरा ब्लॉग लाइक करे शेयर करे। बात है सन 2011 की जब में Bsc. 2nd year  का स्टूडेंट था। मेरे शहर नेपानगर में कोई अच्छा कॉलेज ना होने के कारण मेने नेपा से 50 km दूर खंडवा में एडमिशन लिया था। रोज ट्रैन से दोस्तों के साथ अप-डाउन करना और दिन भर कॉलेज के नाम परहुल्लड़बाजी और मौज-मस्ति करना, बस यही करते थे हम लोग। मै पढ़ाई में बहोत अच्छा था मुझे लगता था कि मै बहोत समझदार हूँ, और वैसे भी दोस्तों के मुँह से सुन रखा था कि कॉलेज लाइफ एन्जॉय के लिए होती हैं, मौज - मस्ती के लिए होती है। तो हम भी लाइफ को ऐसा ही समझ बैठे।    खैर छोड़ो आगे की बात बताता हूँ, जीवन में हम सभी के साथ ऐसा होता ही है कि जब हम अपने दोस्त के लिए अपनी जान तक देने के लिए तैयार हो जाते है यहाँ तक की दोस्ती निभाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था। मेरी एक बहोत अच्छी दोस्त थी जिसका नाम सुनैना( काल्पनिक नाम) था। वह MSc. Chemistry final ईयर की स्टूडेंट थी, मै उसे दीदी बो...

*FLY lIKE YOUR DREAMS*

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Hello friends,                                      I am your friend ak{aklesh KAKODIYA} . Today we will about the success. So can you tell me that what is success? In that case I would say your hard work , passion about your work results are the success. Success is not only a positive things but it's a happiness for you and your others.         Always remind the words in life never though negetive. Because negetivity makes you failed. A person whom never tried anything doesn't understand it's meaning. So what you do , do with your heart and give your efforts 100℅ . Success is coming successfully  behind of you. Jai hind,                                                 AKLESH KAKODIYA

"खुदका व्यापार डालें"

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     आज दिनांक 20/06/2018 को जिला बुरहानपुर मध्य प्रदेश में नवयुवको हेतु स्वरोजगार मेले का आयोजन बुरहानपुर प्रशाशन के द्वारा कराया गया हैं। जिसमे सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवा युवक व् युवतियां लाभुठाये एवं शाशन  के द्वारा लोन लेकर स्वयं का bussiness प्रारम्भ करे।।। जो आज रोजगार मेले का लाभ न ले पाये वे आगामी कार्यदिवसों में ,वरिष्ठ कार्यालय में भी आवेदन कर सकते है। या मुझसे संपर्क करे- 7089828015 अकलेश काकोड़िया